कोरोना युद्ध के कर्मवीरों के प्रोत्साहन के लिये शिवपुरी के युवाओं द्वारा रचित यह कविता वाकई में बहुत सराहनीय होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी है। विवेक एनके धाकड़, दिव्यांशी, सीमा, सचिन, विक्रम कृष्णा, शुभम, विकास, सुनील द्वारा रचित यह कविता उन कोरोना फाइटरों के प्रोत्साहन के लिये लिखी गई है जो इस महामारी से देश को बचाने के लिये हर संभव प्रयासों में दिन-रात लगे हुऐ हैं। हमें एक वार इस कविता का आवलोकन अवश्य करना चाहिऐ।
Covid-19 के खिलाफ एक युद्ध, एक जंग....!
ये वो जंग नही जो हमें, युद्ध भूमि में लड़कर जीतना है।
ये तो वो जंग है जिसे हमें घर पर रहकर ही जीतना है।
Covid- 19 के चलते दुनियाभर में निराशा तो छाई है...
लेकिन, इस निराशा में भी इससे जीतने के लिए आशावान बने रहना है।
सतर्क रहना है, सुरक्षित रहना है... अभी तो हमें covid-19 अंत देखना है।
इस देश के लिए... बस कुछ दिन के लिए... सरकार के साथ रहो... आराम से परिवार के साथ रहो...
हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा देश की स्थिति को देखते हुए और दुनिया के अन्य देशों से सबक लेकर लॉकडाउन रुपी हथियार लाने का जो भरसक प्रयास किया गया है... इससे छोटी ही सही लेकिन एक आशा की किरण नजर आती है.... !
"आने वाले समय में इस साथ को बरकरार रखने के लिए... ये दूरियां जरूरी है....
जाहिर है- परेशानियां है... दिक्कतें... मायूसियां है....!
समस्या में भी जो समाधान को खोज ले... और निडर रहकर लड़ते रहने का जिसमे हो अदम्य साहस उसी देश का नाम है....भारत ।।
हम अकाल से जीते...
हम पोलियो से जीते...
और अब जीतेंगे कोविड-19 से भी।
हम दुनिया के लिए मिसाल बनेंगे।।
उम्मीद... हौशला...
हमें हौशलों को बुलंद रखना है... हमें जरूरत है हाथ बढ़ाने की... उम्मीद का हाथ...!
थाम लेने की उन कमजोर पड़ती उम्मीदों को... उन बुजुर्गों को....!
जिनके पास लकड़ी की लाठी तो है... मगर बुढ़ापे में सहारे की लाठी नही है क्योंकि, इस कोविड-19 से कोई मरे न मरे... मगर भूख से नही मरना चाहिए...।।
"नाकाम नही होंगे, हमें इस कोविड-19 पर विजय पाना है..."
इसलिए दोस्तों... उम्मीद को ज़िंदा रखो... विश्वास को अडिग रखो...।
हिंदुस्तान हमेशा सलामत रहे ऐसा दृढ़ संकल्प मन में रखो...।।
जान को जहां समझो....
घर से बेवजह बाहर निकलने वाले मानव जाति के दुश्मनों ।
घर में ही रहने को आन-बान और शान समझो...।।
हम ही हिम्मत है, हम ही हिंदुस्तान है।।
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