इटारसी से भाेपाल के बीच बन रही तीसरी रेल लाइन पर एक किमी लंबी सुुरंग (टनल) बन रही है। विंध्याचल पर्वत के मिडघाट सेक्शन पर यह रेलवे की सबसे बड़ी सुरंग हाेगी। 180 कर्मचारी राेटेशन में 24 घंटे बूमर मशीन से दिनरात पहाड़ काे काटकर सुरंग बना रहे हैं। अभी 220 मीटर तक पहाड़ काटे जा चुके हैं।
सुरंग की समुद्रतल से ऊंचाई 340 मीटर रहेगी। रेलवे के मुताबिक तीसरी रेल लाइन पर बुदनी से बरखेड़ा (मिडघाट सेक्शन) तक 5 सुरंग बनेंगी। सुरंग आंध्र प्रदेश की मैक्स इंफ्रा लिमिटेड कंपनी एनएटीएम (न्यू अस्ट्रेलियन टेक्नोलॉजी मैथर्ड) पद्धति से बना रही है। यानी सुरंग हॉर्स-शू (घाेड़े की नाल) की तरह रहेगी। पूरा प्रोजेक्ट 1.70 करोड़ रुपए का है। कंपनी ने फरवरी 2023 तक पांचाें सुरंग तैयार करने का लक्ष्य रखा है। मैक्स इंफ्रा कंपनी आंध्रप्रदेश में कड़पा में 10 किमी लंबा टनल बना चुकी। अब कंपनी मिडघाट के पास टनल बना रही है।
पांच टनल ऐसे हाेंगे
- पहला: बुदनी के बाद लंबाई एक किमी
- दूसरा: मिडघाट पर 200 मीटर लंबा बनेगा
- तीसरा: भीमकोठी के पास 250 मीटर का बनेगा
- चौथा: चौका के पास 150 मीटर लंबा होगा
- पांचवा: बरखेड़ा में 450 मीटर का बनेगा।
4 मीटर तक छेद करती है मशीन
सुरंग बनाने के लिए बूमर ड्रिलिंग मशीन का उपयोग हो रहा है। बूमर हेवी ड्रिलिंग मशीन है। इसमें 2 हाइड्रोलिक ड्रिल बिट होते हैं। एक हाइड्रोलिक बाकेट होता है जिस पर इंजीनियर रॉक चट्टान के उस हिस्से को चिंहित करते हैं। बूमर ड्रिल मशीन एक बार में 3 से 4 मीटर तक चट्टान में छेद करने की क्षमता रखती है। छेद होने के बाद कंपनी के एक्सपर्ट इसमें एक्सप्लोसिव का उपयोग करते हैं।
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