दुर्दशा देख ऐसा लग रहा जैसे सालों से बंद पड़ा आईएसबीटी रखरखाव के अभाव में करोड़ों की संपत्ति को लग रहा पलीता

करोड़ों की लागत से तैयार आईएसबीटी इन दिनों सूना है। यहाँ से बसों का संचालन पूरी तरह बंद है। पहले लॉकडाउन चालू होने के कारण और अब बस ऑपरेटर्स की जिद की वजह से बसें नहीं चल रही हैं। 25 मार्च से लेकर अब तक कुल तीन माह से यहाँ सवारियों की आवाजाही बिल्कुल नहीं है, लेकिन यहाँ की दुर्दशा देख ऐसा लग रहा है मानो आईएसबीटी सालों से बंद पड़ा है। आईएसबीटी में बसों के प्रवेश द्वार पर लगा बैरियर टूट चुका है। यहाँ मौजूद क्योस्क भी पूरी तरह खस्ता हाल हो चुका है। हालात ऐसे हैं कि यदि आज बसों का संचालन शुरू हो जाए तो बे रोक-टोक कहीं की भी बसें आईएसबीटी में प्रवेश कर जाएँगी। लॉकडाउन पीरियड में आईएसबीटी के रखरखाव की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया है, यहाँ मौजूद फुटपाथ जगह-जगह से उधड़ गए हैं। जिम्मेदारों की बेरुखी के कारण ही आईएसबीटी के ये हालात हुए हैं।

फुहारा हो चुका चौपट
यदि बात यहाँ मौजूद फुहारे की करें जो कभी यहाँ की शोभा बढ़ाता था आज वो भी पूरी तरह चौपट हो चुका है। फुहारे के बीच घेरे में लगी टाइल्स जगह-जगह से उधड़ चुकी है। सीमेंट बाहर आ चुकी है। यहाँ गंदगी का अंबार है। घेरे में काई के साथ घास के गुच्छों ने जगह बना ली है। आने वाले समय में जब बसों का संचालन शुरू होगा तब दोबारा लाखों की राशि फुहारे को पुन: तैयार करने में खर्च करनी होगी।

6 सौ बसों का संचालन
आईएसबीटी में छोटी-बड़ी मिलाते हुए 6 सौ बसों का संचालन होता है। यहाँ से दमोह, सागर, छिंदवाड़ा, नागपुर, अमरकंटक, कटनी, पन्ना, सीधी, रीवा आदि स्थानों को बसें रवानगी लेती हैं रोजाना हजारों सवारियों की आना-जाता होता है। लॉकडाउन के पहले तक आईएसबीटी की जो रौनक थी वो अब पूरी तरह नदारद हो चुकी है। सूनसान हो चुका आईएसबीटी एक बार फिर गुलजार होने की राह तक रहा है।पी-6

वर्तमान स्थिति

  • साफ सफाई का अभाव है।
  • यहाँ चोरियाँ हो रही हैं।
  • रात में शराबखोरी हो रही है।
  • जिम्मेदार बेखबर हैं।
  • चौकीदार का पता नहीं।

तीन माह से माँग रहे थे मिला एक दिन का राशन
हमारे प्रतिनिधि, जबलपुर। गत तीन माह से बसों का संचालन बंद है। बसों के चालकों-परिचालकों के सामने रोजी रोटी का संकट आन पड़ा है। सभी बार-बार कलेक्ट्रेट जाकर मदद की गुहार लगा रहे थे और जब राशन आया तो उसमें आधा किलो चावल, एक किलो आटा, आधा किलो दाल, आधा लीटर तेल, व पाँच-पाँच रुपए के धनिया मिर्ची के मसालों के पैकेट देख बसों के चालक-परिचालक नाराज हो उठे और सभी ने नारेबाजी शुरू कर दी। चालक-परिचालक एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके मिश्रा ने बताया कि तीन माह से गुहार लगाने के बाद जिला प्रशासन ने राशन तो भिजवाया लेकिन वो राशन इतना कम है कि उनके परिवार के लिए सिर्फ एक दिन की ही पूर्ति कर सकता है।



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Seeing the plight, it seemed as if the property was closed for years due to lack of maintenance of the ISBT.


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