एम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में पांच दिन पहले जिस मरीज की सर्जरी की गई थी, उसकी जांच रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। सर्जरी करने वाले तीनों डॉक्टरों की जांच कराई गई तो एक डॉक्टर की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। अब कांटैक्ट हिस्ट्री के आधार पर उक्त मरीज और पॉजिटिव आए डॉक्टर के संपर्क में आए स्टाफ की लिस्ट तैयार की जा रही है, ताकि इनकी जांच कराई जा सके। दरअसल, 20 जुलाई को न्यूरो सर्जरी विभाग के तीन डॉक्टरों ने अन्य स्टाफ के साथ मिलकर एक मरीज की सर्जरी की थी। कुछ समय तक आईसीयू में रखने के बाद मरीज को सामान्य वार्ड में भर्ती किया गया था। दो दिन बाद मरीज को बुखार आया तो सैंपल लेकर उसकी जांच कराई गई थी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद सर्जरी करने वाले तीनों डॉक्टरों की जांच कराई गई। इनमें से एक डॉक्टर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उनको हॉस्टल में ही क्वारेंटाइन किया गया है। इनके संपर्क में आए 12 से ज्यादा लोगों के सैंपल लिए जाएंगे।
मेडिकल कॉलेज डायरेक्टर के पिता, बेटा पॉजिटिव
शहर के एक बड़े मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर के पिता (87) और बेटे (32) की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। यही नहीं पिता के केयर टेकर और घर में काम करने वाले एक महिला को भी कोरोना का संक्रमण हुआ है। प्रोफेसर कॉलोनी में रहने वाले इस परिवार के 13 लोगों के सैंपल शुक्रवार को लिए गए थे। इनमें से चार लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है।
मंडीदीप के ड्राई पोर्ट तक पहुंचा कोराना, अधिकारी हुए क्वारेंटाइन, डिपो रहा बंद
इधर, मंडीदीप स्थित कॉनकोर के ड्राई पोर्ट में भी अब संक्रमण पहुंच गया है। एक कर्मचारी के काेराेना पाॅजिटिव पाए जाने के बाद उनके संपर्क में आए कस्टम विभाग डिप्टी कमिश्नर समेत चार अधिकारियों को क्वारेंटाइन में भेज दिया गया। साथ ही शनिवार को डिपो पूरी तरह से बंद कर दिया गया। 24 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस डिपो में रोजाना सैकड़ों कंटेनर आते जाते हैं। कॉनकोर प्रबंधन ने पिछले दिनों कोरोना प्रोटोकाल के तहत यहां तैनात सुरक्षाकर्मियों की संख्या 36 से घटाकर 16 कर दी थी। इसके बाद यहां बड़े पैमाने पर बेरोकटोक लोगों का आना जाना बढ़ गया था। साथ ही जरूरी चेकअप भी नहीं हो पा रहा था। यानी कोविड के नियमों में लापरवाही के चलते यह संक्रमण यहां तक पहुंच गया। केंद्रीय कस्टम विभाग ने उक्त कर्मचारी के संपर्क में आए सभी ड्राइवर्स और दूसरे कर्मचारियों को आइसोलेशन में जाने को कह दिया है। इसके चलते न तो माल आ सका और न ही जा सका। यहां रोज 200 टन से अधिक माल की आवक-जावक होती है। हर साल करीब 75 हजार मीट्रिक टन माल की ढुलाई की जाती है।
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