प्रतिभाओं का आंकलन नंबरों से उनकी दक्षता के आधार पर होना चाहिए। कम प्रतिशत वाले बच्चे भी उच्च पदों पर पहुंचते हैं यही उनका श्रेष्ठ परिणाम कह सकते हैं। प्रतिभाओं को सदैव अवसर दें बच्चा योग्य और काबिल होगा तो अवसर का लाभ सफलतापूर्वक उठा पाएगा, उसके लिए बड़ी-बड़ी डिग्रियां या 90-95 प्रतिशत अंक महत्व नहीं रखते।
यह बात साहित्यकार चिंतक डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने ‘क्या 90 प्रतिशत से कम अंक वाले बच्चे प्रतिभावान नहीं होते?’ विषय पर हुई ऑनलाइन परिचर्चा में कही। शिक्षक सांस्कृतिक संगठन संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कुछ अंकों की अभिलाषा रखना गलत नहीं है। महत्वाकांक्षा होना गलत नहीं है, लेकिन जो बच्चे सुविधाओं के अभाव में कम नंबर लाते हैं प्रतिभा में अव्वल होते हैं, उन्हें प्रोत्साहन और सुविधाओं की दरकार रहती है उन्हें निराश कभी नहीं होना चाहिए। साहित्यकार दिनेश बारोट, कवि श्याम सुंदर भाटी, कृष्णचंद्र ठाकुर, सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रकांत वाफगांवकर, सेवानिवृत शिक्षिका वीणा छाजेड़, देवेंद्र वाघेला, महिला सचिव रक्षा के कुमार सहित शहर के साहित्यकार, शिक्षक और अभिभावकों ने भाग लेते हुए
अपनी बात रखी।
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