होस्टल में रहकर पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को हरी और ताजी सब्जी मिलें, इसके लिए उन्होंने खुद ही बागवानी शुरू कर दी। होस्टल के कर्मचारी, शिक्षक और खुद छात्र-छात्राएं यहां किचन गार्डन में हर तरह की सब्जियां उगा रहे हैं। इस नवाचार से जहां होस्टल के बच्चों को ताजी सब्जियां मिल जाती हैं, वहीं दूसरी तरह केमिकल और दूषित पानी में पैदा होने वाली सब्जियों से बीमारियों का खतरा भी कम रहता है। सीहोर जिले में कुल 8 होस्टल में किचन गार्डन बनाया गया है। इन होस्टल में करीब 500 से ज्यादा छात्र-छात्राएं रहती हैं। कक्षा 6 से 8वीं तक के बच्चों के लिए जिले में 8 होस्टल हैं। इनमें 5 होस्टल छात्राओं के लिए और 3 छात्रों के लिए हैं। इन सभी होस्टल में बच्चे और स्टाफ मिलकर खुद ही सब्जियां उगाते हैं। यही नहीं मौसमी फलों की भी स्कूल में भरमार है। अनार हो या जामफल तरह-तरह की वैरायटी के पौधे इन होस्टल में लगे हैं।
पर्यावरण सुरक्षा के लिए भी बेहतर उपाय
जिले के होस्टल में की जा रही बागवानी पर्यवरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी। किचन गार्डन में उगने वाले पौधे पर्यावरण से कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा कम करने में मदद करेंगे। इनसे जलवायु परिवर्तन के हानिकारक प्रभावों को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही होस्टल में सब्जियां बाजर से खरीदना नहीं पड़ेंगी, जिससे आर्थिक बचत भी होगी।
अनार, अमरूद और आंवले के पौधे
डीपीसी श्री श्रीवास्तव ने बताया कि किचन गार्डन में बेहतर तरीके से बागवानी देखने को मिलती है। होस्टल प्रबंधन ने तरह-तरह के पौधे यहां लगाए हैं। सीजन में भुट्टे खाना हों या गाजर, सब यहां उगाया जाता है। कई जगह तो अनार, अमरूद, आंवला, नीबू, पपीता के साथ-साथ तरह-तरह के फ्रूट के पौधे भी लगाए गए हैं ।
जिस छात्रावास में बाउंड्रीवॉल, वहां पर किया प्रयोग
बारिश में यहां मक्का भी बोई जाती है, जिससे बच्चे भुट्टे का भी आनंद ले सकें। जिला शिक्षा केंद्र के डीपीसी अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि जिले के सभी छात्रावास जहां बाउंड्रीवाल है वहां हमने किचन गार्डन बनवाया है। ताकि बच्चे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ प्रकृति से भी जुड़े रहें। स्कूलों में भी किचन गार्डन योजना की शुरुआत करना है, लेकिन इन स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं होने से यह प्रयोग नहीं कर पाए। बाउंड्रीवाल नहीं होने से आवारा मवेशी पौधों को नष्ट कर देंगे।
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