नागपंचमी पर नागचंद्रेश्वर मंदिर में प्रवेश के प्रतिबंध को प्रशासन, पुलिस और नेताओं ने मजाक बना दिया। कानून तोड़ कर लोग मंदिर में पहुंचे। वहां फोटो सेशन किए और सोशल मीडिया पर वायरल कर उन श्रद्धालुओं को अंगूठा दिखाया जो कानून का पालन करते हुए केवल एलईडी पर दर्शन कर लौट गए। अफसर न अपने कर्मचारियों की मनमानी को रोक पाए और न नेताओं की दादागिरी को। प्रशासन ने नागचंद्रेश्वर मंदिर परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित किया था। मीडिया तक को वहां जाने की अनुमति नहीं दी लेकिन मनमानी करने वालों को रोकने में विफल हो गया।
प्रतिबंध था, जांच कराएंगे- प्रशासक
प्रशासक सुजानसिंह रावत कहते हैं कि मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया था। केवल महानिर्वाणी अखाड़े को कुछ पास दिए थे। यदि किसी ने अनधिकृत रुप से प्रवेश किया है तो इसकी जांच कराएंगे। जांच के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि का कहना है कि अखाड़े को जो पास दिए थे, उनमें से 35 का उपयोग हमने अखाड़े प्रतिनिधियों के लिए किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि पुलिस और प्रशासन के कर्मचारियों ने लोगों को दर्शन कराए हैं। व्यवस्था उन्हीं के हाथ थी।
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