निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी से भागने की आदत ने गुरुवार को एक और बुजुर्ग की जान ले ली। 14 दिन में यह तीसरी मौत है जो निजी अस्पतालों द्वारा अपनाए गए गैर जिम्मेदारी पूर्ण रवैए के कारण हुई है। यह स्थिति तब है जब निजी अस्पतालों को कलेक्टर चेतावनी दे चुकी हैं। एसडीएम शहर व स्वास्थ्य प्रभारी शिराली जैन ने कहा वे कल परिजनों से मुलाकात करेंगी।
24 घंटे और तीन अस्पताल फिर भी नहीं बचा सके एक मरीज की जान
- 5 अगस्त, रात 7.30 बजे : शिवपुर निवासी नर्मदा शंकर जोशी (68) हार्ट पेशेंट थे। सीने में दर्द हुआ, सांस लेने में परेशानी थी। वेदव्यास कॉलोनी स्थित आशीर्वाद हॉस्पिटल गए। केस लेने से ना दिया।
- 5 अगस्त, रात 8 बजे : परिजन सीएचएल जैन दिवाकर अस्पताल गए। ये हार्ट पेशेंट है, शुगर ज्यादा है। जिला अस्पताल जाओ।
- 5 अगस्त, रात 9 बजे : जिला अस्पताल में केस लिया। ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा था। वे 24 घंटे जिला अस्पताल में ही रहे।
- 6 अगस्त, शाम 6.30 बजे : अस्पताल में कहा कि एक ही वेंटिलेटर है, वह व्यस्त है। मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
- 6 अगस्त, शाम 7.30 बजे : मेडिकल कॉलेज पहुंचते इससे पहले मौत हो गई।
- 7 अगस्त, सुबह 11 बजे : चूंकि, शव मेडिकल कॉलेज पहुंच गया था, इसलिए कोविड सस्पेक्टेड माना गया। परिजन शव को शिवपुर नहीं ले जा सके।
आशीर्वाद और सीएचएल जैन दिवाकर हॉस्पिटल पर पहले भी लगे हैं आरोप
- 24 जुलाई : चांदनीचौक के एक बुजुर्ग ने दम तोड़ा था। निजी अस्पतालों ने केस नहीं लिया था। उनमें भी आशीर्वाद हॉस्पिटल व सीएचएल अस्पताल शामिल थे। नोटिस देने की बात कही, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- 28 जुलाई : पेटलावद की महिला को अटैक आया। इनका केस भी निजी अस्पतालों ने नहीं लिया। आर्शीर्वाद हॉस्पिटल में स्टाफ नहीं होने की बात कही थी, सीएचएल में टालमटोली करते रहे। इन्हें वेंटिलेटर की जरूरत थी।
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