बड़े शहरों की तर्ज पर शहरवासियों को स्वीमिंग पूल की सुविधा देने 7 साल पहले सीएम शिवराजसिंह चौहान ने घोषणा की, लेकिन स्थान चयन से लेकर बजट नहीं मिलने का हवाला देकर नपा हाथ खड़े करती रही। नतीजतन पुरानी भाजपा परिषद के तीन साल यूं ही बीत गए। दूसरी परिषद को भी 4 साल से ज्यादा समय हो गया, लेकिन 2 करोड़ रुपए से बनने वाला स्वीमिंग पूल अब तक नहीं बन सका। अधिकारियों की ऐसी ही लेतलाली रही तो इस परिषद का कार्यकाल भी स्वीमिंग पूल चालू कराए बगैर पूरा हो जाएगा।
सीएम ने 2013-14 में शाजापुर आगमन के दौरान शहर में स्वीमिंग पूल बनवाने के लिए 2 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। सीएम की घोषणा के करीब 6 माह बाद जमीन की खोजबीन शुरू हुई। तत्कालीन परिषद ने वाटर वर्क्स व मुक्तिधाम के समीप स्वीमिंग पूल बनवाने की प्लानिंग की। लेकिन ऐन वक्त पर स्थान बदलकर स्टेडियम में स्वीमिंग पूल बनाने का भूमिपूजन कर दिया। शुरुआत में निर्माण तेजी से शुरू हुआ। पहली किस्त के 50 लाख में ढांचा तैयार हो गया। इसके बाद दूसरी किस्त अटक गई और ठेकेदार ने निर्माण रोक दिया। कई दिन बाद बजट मिला और फिर काम शुरू हुआ।
दो बार बजट रुकने से अटके काम के चक्कर में तत्कालीन नगर परिषद के 3 साल पूरे हो गए। नई परिषद ने अधूरे कार्यों को तेजी से पूरा कराने का दावा किया, लेकिन इसे भी 4 साल से ज्यादा हो गए। स्थिति यह है कि सीएम की घोषणा के मुताबिक पूरी राशि मिलने के एक साल बाद भी काम पूरा नहीं हो सका। नपा सीएमओ भूपेंद्र दीक्षित के मुताबिक स्वीमिंग पूल का काम लगभग पूरा होने वाला है। मशीनरी संबंधित काम होने से लॉकडाउन में काम बंद रखना पड़ा। दो माह में काम निपटा दिया जाएगा।
भाजपा की हार के बाद अटका बजट
सीएम ने तत्कालीन भाजपा बोर्ड की परिषद के समय स्वीमिंग पूल बनाने की घोषणा की थी, लेकिन दिसंबर 2015 में हुए चुनाव में भाजपा हार गई और नपा में कांग्रेस का बोर्ड बन गया। ऐसे में दूसरी किस्त के बाद शेष बचे 1 करोड़ रुपए अटक गए। इधर, बाद में 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा हार गई और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन गई। शाजापुर में भी कांग्रेस का बोर्ड होने से समीकरण बैठ गए और शेष बचे एक करोड़ रुपए प्रदेश स्तर से जारी हो गए, लेकिन इस बीच करीब दो साल 2016 व 2017 में काम बंद रखना पड़ा।
अब फिर बदल गए राजनीतिक समीकरण
2020 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिर गई। इसके बाद अब फिर से शिवराजसिंह चौहान को मुख्यमंत्री बना दिया गया। इधर, नपाध्यक्ष शीतल भट्ट ने भी कांग्रेस छोड़ भाजपा ज्वाइन कर ली। प्रदेश की सत्ता के साथ ही परिषद भी कांग्रेस की जगह भाजपा की हो गई। इस मौके पर भी यदि वर्तमान परिषद के पदाधिकारी स्वीमिंग पूल का काम पूरा नहीं करा सके तो इसका श्रेय आने वाली परिषद ही लेगी।
तैराकों को मौका मिलेगा : शहर में फिलहाल शासकीय स्तर पर एक भी स्वीमिंग पुल नहीं है। स्टेडियम में स्वीमिंग पूल बनने के बाद शहरवासियों को इसका फायदा मिलने लगेगा। लोगों को तैराकी सीखने के लिए बेहतर जरिया मिल जाएगा। जिले में तैराकी प्रतियोगिताएं भी होने लगेगी। स्टेडियम में प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ियों को इसका फायदा मिलेगा। वर्तमान में जो निजी स्वीमिंग पुल है, वह भी छोटा होने से तैराकी प्रतियोगिता ही नहीं हो पाती।
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