जिले में 49 दिनों में कुल 31 कोरोना पॉजिटिव सामने आए हैं। मार्च और अप्रैल में सिर्फ दो मरीज मिले थे, जबकि मई और जून के 23 दिन में 31 मरीज मिल गए। इन्हीं दो माह में प्रवासी मजदूर लौटे और बाजर भी खुल गए। इधर, 16 से 45 वर्ष के बीच की आयु वाले सबसे ज्यादा पाॅजिटिव आ रहे हैं। यानी कुल मरीजाें के 25 प्रतिशत युवा चपेट में आए हैं। हालांकि स्वस्थ हाेकर भी 33 में से 23 मरीज घर जा चुके हैं। बुजुर्ग व बच्चों को ज्यादा खतरा था, वे ही सबसे कम कोरोना का शिकार हुए हैं। इधर, महाराष्ट्र से आने वाले सबसे ज्यादा 9 मरीज पॉजिटिव निकले हैं। खासबात यह है कि बाहर के राज्याें के जितने भी संक्रमित मिले वे सब ठीक हाे चुके हैं।
सोमवार को एक साथ एक ही परिवार के 7 मरीज संक्रमित पाए गए थे। इसमें 60 साल के हैंडपंप मैकेनिक को डायबिटीज की बीमारी है। जबकि उसी के परिवार के दो बच्चे संक्रमित निकले हैं जो 1-1 साल के हैं। वहीं खुशी की बात यह है कि कोरोना संक्रमित हुए 52 वर्षीय सुरेश आदिवासी निवासी चिटोरा मंगलवार को स्वस्थ्य हो गया है। जिले में अब तक किसी मरीज को वेंटीलेटर की जरूरत नहीं पड़ी है। वे 10 से 12 दिन में स्वस्थ्य होकर घर पहुंच रहे हैं। लेकिन इन सब के बावजूद अभी खतरा टला नहीं है। कारण यह है कि अब जो मरीज सामने आ रहे हैं वे खुद नहीं समझ पा रहे हैं कि वे संक्रमित कहां से हुए।
लॉकडाउन के 71 दिन में सिर्फ 17 और अनलॉक के 23 दिन में मिले 16 संक्रमित
कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए देशभर में किए गए लॉकडाउन के दौरान भले ही जिले में कोरोना संक्रमित उतनी संख्या में सामने नहीं, जितने की अब अनलॉक होने के बाद मिल रहे हैं। यहां बता दें कि 22 मार्च से 30 मई तक रहे लॉकडाउन के दौरान जिले में 15 मरीज मिले। जबकि जून महीने के तीन सप्ताह में 16 मरीज सामने आ चुके हैं।
पहले नहीं आ रहे थे लक्षण, अब जुकाम की दवा लेने वाले मिल रहे पॉजिटिव
मई महीने के चार और जून महीने के दो सप्ताह तक जो कोरोना पॉजिटिव मिले, उनमें 90 प्रतिशत में लक्षण नहीं थे। लेकिन पिछले एक सप्ताह से जो मरीज मिल रहे हैं, उन सभी में सर्दी, जुकाम, बुखार जैसे कोरोना वायरस के सामान्य लक्षण मिल रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में कुछ मरीज ऐसे सामने आए, जो फीवर क्लीनिक में दवा लेने गए जहां कोरोना के संदेह में उनका टेस्ट किया गया तो वे पॉजिटिव पाए गए।
पॉजिटिव केस बढ़े तो बढ़ाई सैंपलिंग
मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रैल महीने में कोरोना संक्रमितों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग सैंपलिंग में भी कंजूसी कर रहा था। लेकिन जैसे जैसे मरीज बढ़ना शुरु हुए तो स्वास्थ्य विभाग ने सैंपलिंग भी बढ़ा दी। यानि पहले 70 दिन में जिले से कुल 1482 सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। जबकि जून महीने के सिर्फ 22 दिनों में 1388 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। वहीं पहले बाहर से आने वाले लोगों को जबरन क्वारेंटाइन कर सैंपल लेना पड़ रहे थे। वहीं अब लोग सर्दी जुकाम की दवा लेने जब अस्पताल पहुंचते हैं तो उनके भी सैंपल लिए जा रहे हैं, जिससे तेजी से संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल पहुंचते हैं तो उनके भी सैंपल लिए जा रहे हैं, जिससे तेजी से संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है।


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