जिले में हाईस्कूल के विद्यार्थियों की भी हमारा घर, हमारा विद्यालय कार्यक्रम की तर्ज पर मई से कक्षा लग रही है। इसका पाॅजिटिव फीडबैक भी आ रहा है। शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ाें के मुताबिक 60.23 प्रतिशत ऐसे हैं जाे ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़े हैं। शेष बच्चाें काे जाेड़ने के लिए शिक्षक बच्चों के घराें तक पहुंच रहे हैं।
विद्यार्थियों की माॅनिटरिंग के लिए शिक्षकाें की ड्यूटी लगाई गई है। शिक्षक प्रत्येक बच्चे के पास 15 मिनट रुककर उनके सवालाें के जवाब दे रहे हैं। जानकारी जिलाधिकारियाें तक पहुंचा रहे हैं, फिर वे भाेपाल भेज रहे हैं। दूसरी तरफ कक्षा पहली से आठवीं के करीब 70 प्रतिशत बच्चाें काे शिक्षा से जाेड़ने के लिए माेहल्ला क्लास जैसे प्रयाेग किए जा रहे हैं।
डीईअाे दिनेश दुबे के मुताबिक 9वीं से 12वीं तक दर्ज विद्यार्थियों की संख्या 57 हजार 643 है। इसमें 21 हजार 129 बच्चे स्मार्ट फाेन पर डिजिलेप डाउनलाेड कर पढ़ाई कर रहे हैं। 12 हजार 603 बच्चे दूरदर्शन व 986 बच्चे सिटी केबल पर प्रसारण देखकर पढ़ाई कर रहे हैं। कुल 34 हजार 718 विद्यार्थी किसी ने किसी माध्यम से पढ़ाई से जुड़े हैं। शेष 22 हजार 925 बच्चे काे शिक्षा के प्रयास जारी है।
कक्षा पहली से आठवीं के बच्चाें काे शिक्षा से जाेड़ने के लिए शिक्षक नीत नए प्रयाेग कर रहे हैं। इसमें शिक्षकाें द्वारा विशेषकर माेहल्ला क्लास संचालित की जा रही है। डीपीसी कमलसिंह ठाकुर ने बताया जिले के लगभग सभी ब्लाॅक में माेहल्ला क्लास के माध्यम से बच्चाें काे पढ़ाया जा रहा है। डीपीसी के अनुसार जिले के कुल 2 लाख 30 हजार बच्चाें में से 30 प्रतिशत यानी 69 हजार बच्चाें के पास स्मार्ट फाेन है जिनके पास स्मार्ट फाेन है। जबकि 1 लाख 61 हजार बच्चाें के पास स्मार्ट फाेन नहीं हाेने पर उन्हें माेहल्ला क्लास से जाेड़ा गया है। इसमें शिक्षक माेहल्ले में पांच-सात बच्चांें काे इकट्ठा कर पढ़ा रहे हैं। हालांकि इस दाैरान साेशल डिस्टेंसिंग का पालन भी किया जा रहा है।
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