कब्जा धारियों पर महरवान कोलारस प्रशासन, आदेश के बावजूद भी नहीं हटाया गया कब्जा

मामला मुरली मनोहर श्री राधा कृष्ण जी मन्दिर की भूमि का 
दबंग रिपोर्ट कोलारस- 
कोलारस अंचल में शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण के कई मामलों की कई फाइलें राजस्व विभाग में वर्षों से धूल खा रही हैं जिनमें आज दिनांक तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। और कई मामले तो सारी हकीकत जाहिर होने पर भी आखिरी फैसले के इंतजार में लटके हुऐ हैं जिनमें आज दिनांक तक कार्यवाही नहीं की गई है ऐसा ही एक मामला विगत दिवस प्रकाश में आया जिसमें वर्षों सुनवाई के उपरान्त अंतिम फैसला लेते हुऐ तहसीलदार कोलारस द्वारा कब्जा हटाये जाने का आदेष तो कर डाला लेकिन अमल नहीं किया गया है। जिससे स्पष्ठ होता है कि कोलारस तहसीलदार कब्जा धारियों पर मेहरवान हैं।

मामला नगर के ग्राम गोरा कस्वा में स्थित शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 325, 370, 371, 372 कुल किता 04 रकवा 4.767 मन्दिर श्री मुरली मनोहर राधा कृष्ण जी प्रबंधक कलेक्टर जिला शिवपुरी के नाम दर्ज है। उक्त शासकीय भूमि पर विगत लगभग 30 वर्षों से नगर के ही नारायणदास, हरिदास पुत्र नारायणदास बैरागी तथा उमेष, रत्नेष, अंकित पुत्रगण हरिदास बैरागी, विनीता बाई पत्नि हरिदास बैरागी, दामोदारदास, संजय, सोनू पुत्रगण स्व. पुरूषोत्तमदास बैरागी द्वारा अनाधिकृत कब्जा कर लिया गया है जिस संबंध में प्रकरण क्रमांक 12/अ-70/2019-20 कोलारस तहसील में दर्ज है उक्त प्रकरण में पूर्व में तहसीलदार न्यायालय द्वारा कब्जा धारियों के विरूद्ध कब्जा न हटाये जाने के संबंध में 15 दिवस जेल भेजने की कार्यवाही भी की जा चुकी है। लेकिन बावजूद इसके आज दिनांक तक कब्जाधारियों द्वारा उक्त भूमि से कब्जा नहीं हटाया गया है। जिसके उपरान्त विगत दिनांक 21 जुलाई 2020 को तहसीलदार कोलारस द्वारा उक्त प्रकरण में आदेष जारी करते हुऐ तीन दिवस के भीतर कब्जा हटाये जाने की कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित किया गया था तथा उक्त आदेश  की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोलारस, थाना प्रभारी कोलारस को उपयुक्त पुलिस वल मुहैया कराने तथा राजस्व निरीक्षक वृत्त-1 कोलारस सहित संबंधित (पुजारी) को सूचनार्थ भेजी गई थी। लेकिन इसके उपरान्त भी आज दिनांक तक कोलारस तहसीलदार द्वारा उक्त कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया गया है इस पर जब पीड़ित ने नायव तहसीलदार कोलारस से बातचीत की तो आज-कल तथा अलग-अलग प्रकार से भ्रामक जानकारी दी गई तथा अधिक पूछताछ के बाद नायव तहसीलदार द्वारा उक्त कार्यवाही न करने की बात स्पष्ठ कही गई है जिसने इस प्रशासनिक कार्यवाही को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। आरोप है कि तहसीलदार कोलारस द्वारा उक्त प्रकरण में कब्जा धारियों से सांठ-गांठ कर मामले में समय ब्यतीत किया जाकर कब्जा धारियों को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है।
कब्जा हटाने की बजाय पंचनामा कर लौटा सरकारी महकमा-
तहसीलदार द्वारा दिनांक 21.07.2020 को दल गठित कर उक्त भूमि से तीन दिवस के भीतर कब्जा हटाये जाने का आदेश दिया गया था किन्तु आदेश दिनांक से एक सप्ताह बाद विगत दिवस गुरूवार को राजस्व अमला मौके पर जाकर सिर्फ पंचनामा वनाकर ही लौट आया। 

जिलाधीश महोद्या भी रहीं खामोश-
उक्त मामले में कोलारस प्रशासन द्वारा वरती जा रही लापरवाही के संबंध में जिलाधीश महोदया को भी फोन पर तथा उनके व्हाटस्एप के जरिये मामले से अवगत कराया गया था  जिस पर जिलाधीश महोद्या द्वारा भी मामले को संज्ञान में लेने तथा उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और नतीजन राजस्व महकमे ने मामले पर लीपापोती कर दी है।

इनका कहना है कि-
सभी तथ्य साफ हो जाने के उपरान्त तहसीलदार महोदय द्वारा उक्त प्रकरण में कब्जा हटाये जाने का आदेश किया था लेकिन बाद में उक्त भूमि पर से कब्जा नहीं हटाया गया है केवल पुनः राजस्व निरीक्षक से जांच प्रतिवेदन मांगा है। जबकि मामले में निर्णायक आदेश के उपरान्त किसी अन्य कार्यवाही की कोई गुंजाइश ही नहीं है। यह नियम विरूद्ध कार्यवाही तहसीलदार महोदय द्वारा की जाकर मामले को अनावश्यक उलझाया जा रहा है। जिससे प्रतीत होता है कि तहसीलदार महोदय द्वारा कब्जाधारियों को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। कोलारस प्रशासन उक्त भूमि पर खड़ी फसल को कटवाने में कब्जाधारियों को मदद स्वरूप मामले को उलझाकर समय ब्यतीत कर रहा है। जिसके विरूद्ध में माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेने के लिये मजबूर हूं।
पुजारी पुरूषोत्तम बैरागी 
निवासी कोलारस 

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