पहली बार... सवारी छोटे रूट से, कावड़ियों-भक्तों पर रोक, नागचंद्रेश्वर के दर्शन भी नहीं

हमारे सबसे बड़े सवाल का जवाब मिल ही गया। कोरोना संक्रमण में भी सवारी तो निकलेगी, लेकिन कई पाबंदियों के साथ। इस बार भक्त महाकालेश्वर को जल भी अर्पित नहीं कर सकेंगे। भक्तों को केवल ऑनलाइन परमिशन से दर्शन की अनुमति होगी। नागपंचमी पर भी नागचंद्रेश्वर मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। श्रावण-भादौ में निकलने वाली महाकालेश्वर की सवारी भी नए मार्ग से निकलेगी। लेकिन सवारी के दर्शन श्रद्धालु नहीं कर सकेंगे। सवारी मार्ग की तरफ आने वाले सभी रास्ते ब्लॉक रहेंगे
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने मंगलवार को बैठक में श्रावण-भादौ की दर्शन और सवारी की व्यवस्था तय कर दी। कलेक्टर आशीष सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए फैसलों के अनुसार पहली बार नए छोटे मार्ग से सवारी निकलेगी। 25 जुलाई को नागपंचमी पर मंदिर के शीर्ष पर स्थित श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। ऐसा पहली बार होगा, जब नागपंचमी पर श्रद्धालु श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन नहीं कर पाएंगे। प्रशासन एलईडी पर दर्शन की व्यवस्था करेगा। मंदिर में केवल शासकीय पूजन होगा। महंत विनीत गिरि के अनुसार मंदिरों के गर्भगृह में प्रवेश पर प्रतिबंध होने से फिलहाल यह निर्णय लिया है।

बैठक में महाकाल दर्शन व्यवस्था के दौरान पुजारियों ने भगवान पर जल चढ़ाने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया लेकिन प्रशासन ने इसे मंजूर नहीं किया। श्रावण में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को एक दिन पहले ऑनलाइन परमिशन लेना होगी। केवल श्रद्धालुओं की संख्या 10 हजार तक करने का टारगेट है। दर्शन का समय भी सुबह 5.30 से रात 9 बजे तक किया गया है। बैठक में एसपी मनोज कुमार सिंह, अपर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी, प्रशासक एसएस रावत, पं.आशीष शर्मा एवं प्रदीप गुरु, महंत विनीत गिरी मौजूद थे।

मंदिर में ऐसे होंगे दर्शन

  • श्रद्धालुओं को मंदिर के मोबाइल एप पर ऑनलाइन लाइन परमिशन लेना होगी।
  • वे मंदिर में प्रसाद, पूजन सामग्री, बैग आदि नहीं ले जा सकेंगे।
  • प्रवेश द्वार पर उनकी मेडिकलजांच होगी।
  • केवल महाकाल मंदिर में नंदीगृह के पीछे गणेश मंडप से दर्शन होंगे।
  • श्रद्धालु केवल महाकाल के दर्शन करेंगे, परिसर के अन्य मंदिरों में नहीं जाएंगे
  • दर्शन के बाद उन्हें निर्गम द्वार कीओर जाना होगा।
  • महाकाल अन्नक्षेत्र पूरी तरह बंदरखा जाएगा।

सवारी का यह रहेगा स्वरूप

  • मंदिर के सभा मंडप में भगवान के चंद्रमौलेश्वर स्वरूप का पूजन सीमित लोगों के बीच होगा।
  • पूजन में केवल अनुमतिधारक अधिकारी-कर्मचारी, पुजारी व कहार रहेंगे।
  • अनुमति अधिकतम 50 लोगों को दिए जाने की संभावना।
  • सवारी में भक्त व झांझ मंडल आदि को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
  • सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
  • सवारी तय किए गए नए मार्ग से निकाली जाएगी व वापस मंदिर आएगी।
  • रामघाट और दत्तअखड़ा घाट पर भी श्रद्धालुओं का प्रवेश रोका जाएगा।

यह होगा सवारी मार्ग

  • महाकाल से रामघाट- महाकाल मंदिर से बड़ा गणेश, हरसिद्धि चौराहा, सिद्धआश्रम के सामने से होकर रामघाट पर पूजन होगा।
  • रामघाट से महाकाल- रामघाट से रामानुज कोट, पाल, हरसिद्धि चौराहा, बड़ा गणेश के सामने से होकर महाकाल मंदिर पहुंचेगी।


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For the first time ... ride by a short route, stop the devotees of Kavadi, not even the sight of Nagachandreshwar


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