100 साल में यह दूसरी बार ऐसा मौका आया है जब ईद उल अजहा पर ईदगाह में नमाज अदा नहीं होगी और ना ही काजी हाउस से चल समारोह निकलेगा। शहर की सभी मसजिदों में 5-7 लोगों द्वारा सुबह 9 बजे ईद की नमाज अदा की जाएगी। कोरोना के कारण यह ईद भी ईद उल फितर की तरह सादगी व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शनिवार को मनाई जाएगी। इस पीढ़ी ने पहली बार देखा कि किसी बीमारी के कारण पूरे देश में दोनों ईद नहीं मनाई जा सकी और लोगों ने अपने घरों में रहकर ही ईद मनाई। बुजुर्गों की मानें तो 1919 में भी इसी प्रकार की बीमारी आई थी। जिस कारण लोग शहर छोड़ कर अपने गांव या खेतों पर चले गए थे। उस साल भी ईदगाह में ईद की नमाज अदा नहीं की जा सकी थी। और अब 100 साल बाद ईदगाह में ईद की नमाज अदा नहीं की जा रही है।
काजी हाउस से निकलने वाला चल समारोह भी स्थगित रहेगा
प्रशासन ने दी शनिवार को लॉकडाउन में छूट
कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने जिले में शनिवार और रविवार को संपूर्ण लॉकडाउन किए जाने के निर्देश जारी किए थे। शनिवार को ईद उल अजहा होने पर मुस्लिम समाजजनों की ओर से शहर काजी और चीफ काजी ने प्रशासन को पत्र लिखकर शनिवार को लॉकडाउन में छूट देने की अनुमति मांगी थी। चीफ काजी सैयद आसिफ अली ने बताया प्रशासन को आश्वासन दिया है कि ईद सादगी से प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए मनाई जाएगी। इसी के तहत समाज ईद का पर्व मनाएगा। ईदगाह में नमाज अदा नहीं की जाएगी और काजी हाउस से निकलने वाला चल समारोह भी स्थगित किया गया है। काजी हाउस में परिवार के साथ सुबह 9 बजे ईद की नमाज अदा की जाएगी। मसजिदों में 5-7 लोगों द्वारा ईद की नमाज अदा की जाएगी। नमाज के बाद न गले मिला जाएगा और न हाथ मिला कर मुसाफा किया जाएगा। समाजजन केवल अपने घर में रहकर अपने परिवार के साथ ईद मनाएंगे व घर में ही नमाज अदा करेंगे। किसी भी प्रकार का सार्वजनिक भोज व ईद मिलन समारोह का आयोजन नहीं होगा।
कोरोना के खात्मे की दुआ करेंगे
काजी ने बताया यह माह हज का है और इस बार हिंदुस्तान से कोई भी हाजी हजयात्रा पर नहीं गया है। सऊदी सरकार ने केवल कुछ लोगों को जो वहीं के निवासी हैं, उन्हें ही हज की इजाजत दी है और उसमें भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सख्ती से अनिवार्य किया है। ईद के दिन पूरे विश्व में कोरोना के खात्मे, अमन व तरक्की के लिए तथा अगले साल हिंदुस्तान से लोग हज को जा सकें, इस हेतु नमाज में दुआएं की जाएंगी। काजी ने बताया इस मर्तबा पूरे हिंदुस्तान में दोनों ईद नहीं मनाई जा सकी और लोगों ने अपने घरों में रहकर ही ईद मनाई। उन्होंने बताया बुजुर्ग बताते थे कि 1919 में भी इसी प्रकार की बीमारी आई थी जिस कारण लोग शहर छोड़ कर गांव या खेतों में चले गए थे। उस साल भी ईदगाह में ईद की नमाज अदा नहीं की जा सकी थी।
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