श्रावण का द्वितीय शनि प्रदोष शनिवार को है। शनि प्रदोष में श्रावण शुक्ल पक्ष के शनि प्रदोष की युक्ति के साथ अगले दिन सूर्योदय पूर्व शुक्र मिथुन राशि में बुध का कर्क राशि में प्रवेश हो रहा है। सुबह 6.49 से रवि योग की युक्ति निर्मित हो रही है। इसके लिए शिव जी का रुद्राभिषेक, रामचरितमानस का पाठ, शनिदेव का तेलाअभिषेक करना अत्यंत पुण्य फलदाई होगा।
भगवान शिव की पूजा शनि की पीड़ा से मुक्ति दिलाने वाली होती है और जब भगवान शिव की सबसे प्रिय तिथि प्रदोष (त्रयोदशी) शनिवार को आ जाए तो यह दिन और भी विशेष हो जाता है। साथ पुण्यप्रद शनिप्रदोष पर श्रावण माह का संयोग बन जाए तो पुण्य प्राप्ति में अनन्य गुना वृद्धि होती है। सालों बाद जब श्रावण माह, प्रदोष तिथि और शनिवार का संयोग बने और वह भी एक ही माह में दो बार। इस संयोग में की गई उपासना पूजन से शनि जन्य पीड़ा शीघ्र लाभ मिलता है।
धर्म-पुण्य के मार्ग पर चलने वालों को शनि देव शुभ फल देते हैं
पं. संजयशिवशंकर दवे ने बताया शनि देव व्यक्ति की साधना उपासना और भक्ति के अनुरूप उसे शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं, जो व्यक्ति नियमित रूप से दान-धर्म-पुण्य- नीति के मार्ग पर चलता है शनि देव उसके लिए अत्यंत शुभ फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया 24 जनवरी को शनि देव का मकर राशि में प्रवेश हुआ तथा यह 29 अप्रैल 2022 तक मकर राशि में भ्रमण करेंगे। इस बार शनि की साढ़ेसाती की प्रभाव युक्त धनु, मकर , कुंभ राशि वाले जातक को विशेष रूप से श्रावण मास के शनि प्रदोष के दिन शनि देव का अनुग्रह प्राप्ति हेतु सर्वश्रेष्ठ है। इस दिन जरूरतमंद को यथासंभव दान सहित रुद्राभिषेक, शनि देव का तेलाभिषेक, रामरक्षास्तोत्र सहित महामृत्युंजय मंत्र के जाप से शनि जन्य सभी अनिष्ट प्रभाव में कमी आती है और अवरोध दूर होकर कार्यसिद्धि होती है।
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