18 की जगह 38 महीने बीते, 1030 में से एक भी गरीब को नहीं मिला आवास, अब काम बंद

मेडिकल कॉलेज के पीछे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1030 आवास का प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हो सका है। 18 महीने में प्रोजेक्ट खत्म होना था, जिसे नगर पालिका 38 महीने बाद भी पूरा नहीं करा पाई है। गरीबों का अपने घर का सपना अब तक अधूरा है। लोग अभी भी किराए पर रहने काे मजबूर हैं।
एएचपी (भागीदारी में किफायती आवास) घटक के इस प्राेजेक्ट में केंद्र और प्रदेश सरकार से प्रति आवास सब्सिडी के रूप में 3-3 लाख रुपए के मान से 80% राशि मिली है। इसी से प्रोजेक्ट का अधिकांश काम हो पाया है। शेष बजट की व्यवस्था खुद नगर पालिका को करना थी। इसके लिए पास ही 102 प्लॉट और 252 फ्लैट बेचे जाना थे लेकिन नगर पालिका अभी तक न एक भी प्लॉट बेच पाई न फ्लैट। बजट नहीं होने से 1030 आवासों का प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है। स्थिति यह है कि तीन साल पहले जो हितग्राही 20-20 हजार रुपए जमा कराकर आवास बुक करा चुके हैं, उन्हें अभी तक आवास नहीं मिले हैं। वे कभी नगर पालिका तो कभी कलेक्टोरेट के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

दो हितग्राहियाें का दर्द आवास कब मिलेंगे, कोई जवाब तक नहीं दे रहा

1. तीन साल पहले 20 हजार रुपए दिए, अब कह रहे दोबारा सर्वे कराएंगे
हितग्राही शाकिर खान ने बताया कि वे 20 हजार रुपए जमा कर आवास बुक कर चुके हैं। अब आधार, आय प्रमाण पत्र किरायानामा और शपथ पत्र मांग रहे हैं। बुकिंग के दौरान ज्यादा कुछ नहीं मांगा था। अब फिर से सर्वे कराने की बात कही जा रही है। पता नहीं कब तक हमें अपना घर नसीब हाेगा

2. तीन साल में 1 लाख रु. किराया दे चुके, अभी तक आधा ऋण चुका देते
हितग्राही देवेंद्र कुमार का कहना है कि वे हर महीने 3 से 4 हजार रुपए किराया दे रहे हैं। एक लाख रु. से ज्यादा किराया दे चुके हैं। यानी अभी तक आधा ऋण चुका देते। प्रधानमंत्री आवास के लिए फरवरी 2017 में ही 20 हजार रुपए जमा बुकिंग करा दी थी। तमाम चक्कर काटने के बाद आवास आवंटित नहीं हुआ।

ठेकेदार का तर्क पांच करोड़ का भुगतान रुका, इसलिए काम बंद
आवास प्रोजेक्ट का अभी काफी काम बचा है। 250 से 300 आवास लगभग बन चुके हैं। सिर्फ ड्रेनेज, सीवर आदि का काम बाकी है। अन्य आवास बनना बाकी हैं। ठेका कंपनी के प्रोजेक्ट इंचार्ज सोनू भदौरिया का कहना है कि दिवाली से पहले दो करोड़ से ज्यादा का बिल दिया था, दिवाली बाद 13 लाख रु. ही नगर पालिका से मिले हैं। अब तीन करोड़ रु. का एक और बिल मिलाकर कुल करीब पांच करोड़ रुपए का भुगतान पड़ा है। भुगतान नहीं होने से काम बंद है।

1.80 लाख का हितग्राही ऋण भी दिलाना होगा
आवास प्रोजेक्ट के तहत प्रति आवास 6.50 लाख रुपए का खर्च आ रहा है। 3-3 लाख रुपए सब्सिडी सरकार से मिल चुकी है। हितग्राहियों से बुकिंग राशि 20-20 हजार रुपए जमा कराई है। अब हितग्राहियों का 1.80 लाख रुपए का ऋण बैंक से स्वीकृत कराना है। शेष 1 लाख रुपए की व्यवस्था के लिए प्लॉट और फ्लैट बेचकर नपा को प्रोजेक्ट पूरा कराना है।
आवास आवंटित कराएंगे
1030 आवासाें का काम अभी रुका हुआ था। कोरोना संक्रमण की वजह से बंद हो गया। अब फिर से शुरू कराएंगे। लोन मंजूर करवाकर और प्लॉट व फ्लैट बेचकर बजट की व्यवस्था की जा रही है। 200 आवास बनकर तैयार हैं, उनका भी आवंटन जल्द कराएंगे।
अनुग्रहा पी., कलेक्टर, शिवपुरी




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38 months have passed in place of 18, out of 1030, not one poor got accommodation, now work stopped


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