कानून की किताबों में स्व. संघी के मुकदमें बने नजीर

मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य स्व. जेपी संघी की रविवार को 92वीं जयंती है। वे शहर की ऐसी शख़्सियत थे जिन्होंने वकालत को ही अपना मजहब बनाया और दीगर कारोबार से हमेशा दूर ही रहे। राजनीति की तरफ तो उन्होंने कभी देखा तक नहीं। हाईकोर्ट की जबलपुर में हुई स्थापना से ही 69 वर्षों तक वकालत करते हुए स्व. श्री संघी ने कई मील के पत्थर स्थापित किए। वकालत के दौरान स्व. श्री संघी द्वारा दी गईं दलीलों के आधार पर जीते गए कई मुकदमे आज भी कानून की किताबों में नजीरों के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। उनका अनुकरण करते हुए उनके पुत्र आरके संघी व आदित्य संघी ने वकालत के क्षेत्र में अच्छी प्रतिष्ठा अर्जित की। स्व. संघी के पोते जस्टिस विपिन संघी दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति हैं।



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Self in the books of law Nazir becomes a lawmaker for Sanghi


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