शहर से करीब 12 किमी दूर आंबाझर स्थित 100 साल से ज्यादा अतिप्राचीन शिव मंदिर में इस बार सावन की धूम नहीं है। काेराेना वायरस के चलते अभी मंदिर अाम श्रद्धालुअाें के लिए बंद है। वहीं यहां पर सिर्फ मंदिर से जुड़े लाेग पूजन कर रहे हैं। इसके अलावा यहां पर कावड़ यात्राओं के प्रवेश पर भी राेक लगाई गई है।
मंदिर से जुड़े अशाेक साेमानी व पं. अनिल शर्मा ने बताया कि मंदिर 100 साल से ज्यादा पुराना है। यहां पर सावन माह में हर दिन सैकड़ाें की संख्या में श्रद्धालुओं काे तांता लगा रहता था। इस बार काेराेना वायरस के चलते प्रशासन ने मंदिर काे बंद रखने के ही निर्देश दिए हैं। जिसके चलते मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए बंद है। वहीं इस बार कावड़ यात्राओं के प्रवेश पर भी राेक लगाई गई है। हर बार यहां पर सावन माह में भगाेरा, अांबाचंदन, कटकटखेड़ी, नेऊगुराड़िया, कराेंदिया सहित कई गांवाें से 11 से ज्यादा कावड़ यात्राएं भाेलेनाथ काे जल चढ़ाने अाती है। इस बार ये यात्राएं भी नहीं अाएंगी। हालांकि कुछ श्रद्धालु अपनी मन्नत के हिसाब से जरूर अकेले कावड़ लेकर यहां जल चढ़ाने के लिए पहुंच रहे हैं।
जय भाेले धार्मिक सेवा मंडल कावड़ यात्रा निरस्त
शहर में 25 वर्षाें से जय भाेले धार्मिक सेवा मंडल द्वारा औंकारेश्वर से चक्कीवाले महादेव मंदिर तक की कावड़ यात्रा निकाली जाती रही है। महंत पं. राधेश्याम भार्गव ने बताया कि इस बार काेराेना वायरस के चलते कावड़ यात्रा काे निरस्त किया गया है। कावड़ यात्रा 15 से 20 जुलाई के बीच निकलना थी जिसे निरस्त कर दिया गया है।
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